हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, निम्नलिखित रिवायत "वसाइल उश शिया" किताब से ली गई है। इस रिवायत का पाठ इस प्रकार है:
امام صادق علیه السلام:
قیـلَ لاَِبِـی عَبْـدِاللّه علیهالسلام:لِلْمُؤمِنین مِنَ الاَْعْیادِ غَیْرُ الْعیدَیْنِ وَ الْجُمُعَةِ؟ قالَ: نَعَمْ لَهُمْ ما هُوَ اَعْظَمُ مِنْ هذا، یَوْمٌ اُقیمَ اَمیرُالْمُؤْمِنینَ علیه السلامفَعَقَدَ لَهُ رَسُولُ اللّه الْوِلایَةَ فِی اَعْناقِ الرِّجالِ وَالنِّساءِ بِغَدیرِخُمٍّ.
इमाम जाफ़र सादिक़ (अ) से पूछा गया:
क्या ईमान वालों के लिए ईद-उल-फ़ित्र, ईद-उल-अज़हा और शुक्रवार के अलावा कोई और ईद होती है?
इमाम ने जवाब दिया:
हाँ, उनके पास इनसे भी बड़ी ईद है, और वह वह दिन है जब ग़दीर ख़ुम में अमीरुल मोमेनीन (अ) का हाथ उठाया और अल्लाह के रसूल (स) ने मर्दों और औरतों के लिए विलायत को ज़रूरी कर दिया।
वसाइल उश शिया, भाग 7, पेज 325, हदीस 5
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